सामान्यतः मनुष्य की प्रमुख समस्यायें शिक्षा, निवास, भोजन, वस्त्र, पेयजल, चिकित्सा, विवाह प्रकृति तथा पर्यावरण अथवा मनुष्य या समाज व शासन द्वारा निर्मित अथवा घटित आपदाओं से निजात पाना होता है। हालांकि शासन प्रशासन द्वारा इस सभी समस्याओं के निस्तारण/निवारण हेतु नाना प्रकार के साधन व सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती है, किन्तु इतने विशाल जन समुदाय को देखते हुये यह पर्याप्त नही होती है। साथ ही इनकी पूर्ण जानकारी भी नही हो पाती जिससे याच्छित व्यक्ति उन सुविधाओं व साधनों को प्राप्त नहीं कर पाता। इतना ही नहीं अपितु अशिक्षा, स्वार्थ, लालच, बेईमानी, और भ्रष्टाचार के कारण उक्त साधन व सुविधाओं का अल्प अंश ही वांछित व्यक्तियों तक पहुॅच पाता है और समस्यायें ज्यों की त्यों रहती हैं मनुष्य के अनियंत्रित व असंतुलित क्रिया कलापों के कारण पर्यावरण पर भी अत्यन्त बुरा प्रभाव पडा है। प्राकृतिक संशाधन, नदियों एवं भूमिगत जल भी प्रदूषण से अछूते नहीं है, जिससे जल जीव व पक्षी तथा वन्य जीवों के प्राणों पर भी संकट उत्पन्न हो गया है। उपरोक्त सभी समस्याओं का निराकरण वास्तव में जनसेवा व परोपकार की परिधि में पाता है। &nb