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शिक्षा

समाज गतिशील है किन्तु समाज में अशिक्षा उसकी गति में बाधा पहुॅचाती है और उस गति की बाधा समाज के उत्थान में बाधा पहुॅ

समाज गतिशील है किन्तु समाज में अशिक्षा उसकी गति में बाधा पहुॅचाती है और उस गति    की बाधा समाज के उत्थान में बाधा पहुॅचाती है अतएव सामाजिक उत्थान के लिये प्रत्येक नर-नारी       का शिक्षित होना आवश्यक है। यदि अशिक्षित या कम शिक्षित समाज में शिक्षा की ज्योति जगाई जाये तो उसका सीधा प्रभाव बच्चों पर पडेगा क्योंकि शिशुओं  के शिक्षा की नींव उसके माता पिता एवं परिवार की छांव में पडती है। यदि माता पिता के शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा हो जायेगी तो नवजात शिशु के शिक्षा मार्ग वहीं से प्रशस्त हो जायेगा यदि बालक या बालिका शिक्षोन्मुखी हो जायेगा तो एक सर्वशिक्षित समाज बनेगा, जो समाज को प्रगति के रास्ते पर ले जायेगा।

                वर्तमान समय की स्थिति यहॉ विचारणीय हो जाती है कि यदि हम समाज को प्रगति के मार्ग पर ले जाना चाहते हैं तो हमें उन निर्धन समाज की ओर रूख करना होगा जो गरीबी से जूझ रहे हैं और चाहते हुए भी अपनी संतानों को शिक्षित नहीं करवा पा रहे हैं। इसके लिये यह ट्रस्ट (न्यास) न

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