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पेयजल, जल संरक्षण व वृक्षारोपण

मानव समाज द्वारा वन संपदा के दोहन के फलस्वरूप प्रकृति द्वारा उत्पन्न की गयी बाढ सूखा की विभीषका से आज देश का अधिकांश क्षेत्र जलाभाव से जूझ रहा है

मानव समाज द्वारा वन संपदा के दोहन के फलस्वरूप प्रकृति द्वारा उत्पन्न की गयी बाढ सूखा की विभीषका से आज देश का अधिकांश क्षेत्र जलाभाव से जूझ रहा है मानव जाति के साथ अन्य समस्त जीवों को पानी की कितनी आवश्यकता होती है, इसे सर्व समाज विज्ञ है। आज स्थिति यह है कि मानव जाति,पशुपक्षियों एवं अन्य जीवों को बहुत से स्थानों पर पीने भर का पानी उपलब्ध नही है। इसका कारण हमें जो भी वर्षा का जल प्राप्त होता है, उनका संरक्षण न हो पाना। हमारे देश में समाज के एक स्वार्थी, धनलोलुप वर्ग द्वारा प्रकृति निर्मित एवं मानव निर्मित जल संरक्षण स्रोतों का विनाश किया जा रहा है जिससे जल उन स्रोतों में एकत्र होकर भूमि के अंदर जाने के बजाय बहकर नदियों के माध्यम से समुद्र में चला जा रहा है एवं भू-जल स्रोत समाप्तप्राय हो गया है। जिसका दंश समाज का बहुसंख्यक वर्ग झेल रहा है।

                अतः न्यास जल स्त्रोत के संरक्षण, नये जल स्त्रोत के निर्माण हेतु समाज में जागरूकता पैदा करने का कार्य करेगा जिससे भूमि के अंदर जल संरक्षण हो सके और मानव समाज को ज्यादा से ज्य

पेयजल, जल संरक्षण व वृक्षारोपण